📖 दिल का दरिया
सबूत की तलाश
सुधा की धमकी के बाद आर्या के मन में डर और बेचैनी थी, लेकिन आदित्य के समर्थन ने उसे हिम्मत दी थी। उसने सोचा, 'मैं चुप नहीं बैठ सकती। मुझे सबूत जुटाने होंगे।' उसने तय किया कि वह नौकर से बात करेगी, जिसने उसके खिलाफ झूठी गवाही दी थी। वह जानती थी कि नौकर डरा हुआ है, लेकिन शायद वह उसका विश्वास जीत सकती है।
आर्या ने आदित्य से कुछ नहीं कहा, क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि वह और मुश्किल में पड़े। वह अकेले ही नौकर के घर जाने का फैसला किया। शाम ढलते ही आर्या गाँव के किनारे बने नौकर के छोटे से घर पहुँची। घर के बाहर मिट्टी का चूल्हा था, और अंदर से बीमार माँ की खाँसी सुनाई दे रही थी।
आर्या ने दरवाज़ा खटखटाया। नौकर ने दरवाज़ा खोला तो उसे देखकर चौंक गया। 'तुम यहाँ?' उसने घबराते हुए कहा। आर्या ने शांत स्वर में कहा, 'मैं तुमसे बात करने आई हूँ।' नौकर ने उसे अंदर बुलाया, लेकिन उसकी आँखों में डर साफ़ दिख रहा था।
अंदर, नौकर की माँ बिस्तर पर पड़ी थी, बुखार से तप रही थी। आर्या ने देखा कि दवा का डिब्बा खाली पड़ा था। उसने तुरंत अपनी साड़ी की गाँठ से कुछ पैसे निकाले और नौकर को दिए, 'जाओ, माँ के लिए दवा ले आओ।' नौकर ने झिझकते हुए कहा, 'लेकिन...' आर्या ने उसे रोका, 'पहले दवा लाओ, बाद में बात करेंगे।' नौकर दवा लेने चला गया। आर्या ने माँ के पास बैठकर उसका माथा सहलाया।
माँ ने कमज़ोर आवाज़ में कहा, 'बेटी, तू बहुत अच्छी है।' आर्या ने मुस्कुराकर कहा, 'आप आराम करें।' कुछ देर बाद नौकर लौटा, और आर्या ने उससे पूछा, 'तुमने मेरे खिलाफ झूठी गवाही क्यों दी?' नौकर ने नीचे देखा, 'मुझे मजबूर किया गया था।' आर्या ने पूछा, 'किसने?' नौकर ने इधर-उधर देखा, फिर धीरे से बोला, 'मालकिन ने। उसने मुझे पैसे दिए थे और धमकी दी थी कि अगर मैंने बात नहीं मानी तो मुझे नौकरी से निकाल दिया जाएगा।' आर्या ने उसका हाथ पकड़ा, 'तुम्हें सच बोलना होगा।' नौकर ने सिर हिलाया, 'लेकिन मैं डरता हूँ।' उसी समय, दरवाज़े पर दस्तक हुई। नौकर घबराकर उठा। दरवाज़ा खोला तो सुधा खड़ी थी।
उसने तीखी नज़र से आर्या को देखा, 'तुम यहाँ क्या कर रही हो?' आर्या ने संयम से कहा, 'मैं सच जानने आई थी।' सुधा ने नौकर की तरफ देखा, 'अगर तूने इस लड़की की बात मानी, तो तुझे नौकरी से निकाल दिया जाएगा और तेरी माँ का इलाज भी बंद कर दिया जाएगा।' नौकर डर के मारे काँपने लगा। सुधा ने आर्या से कहा, 'तुम्हारी एक नहीं चलेगी। मैंने उसे पैसे दिए हैं, और वह मेरी बात मानेगा।' आर्या ने दृढ़ता से कहा, 'आप गलत कर रही हैं।' सुधा ने ठंडी मुस्कान के साथ कहा, 'मैं जो चाहूँ वही करूँगी।' और वह वहाँ से चली गई। नौकर ने आर्या से कहा, 'मैं कुछ नहीं कर सकता।
मुझे माफ़ कर दो।' आर्या ने उसकी आँखों में देखा, 'मैं समझती हूँ। लेकिन सच को दबाया नहीं जा सकता।' नौकर की माँ ने यह सब सुना था। उसने आर्या को पास बुलाया और कमज़ोर आवाज़ में कहा, 'बेटी, मैं तुझे कुछ बताना चाहती हूँ।' आर्या ने उसके पास जाकर उसका हाथ थामा। माँ ने कहा, 'सुधा ने कुछ साल पहले तेरे पिता की ज़मीन हड़पने के लिए जाली दस्तावेज़ बनवाए थे।
मेरे बेटे ने उस समय उसके लिए काम किया था। उसने देखा था कि सुधा ने कागज़ों पर हस्ताक्षर बदले थे।' आर्या की आँखें चौड़ी हो गईं। उसने पूछा, 'क्या आप सच कह रही हैं?' माँ ने सिर हिलाया, 'हाँ, बेटी। मैंने खुद देखा था।
वह कागज़ अभी भी मेरे पास हैं।' आर्या ने हैरानी से पूछा, 'आपके पास हैं?' माँ ने बिस्तर के नीचे से एक पुराना डिब्बा निकाला और उसमें से कुछ कागज़ निकाले। 'ये ले, बेटी। ये सबूत हैं।' आर्या ने काँपते हाथों से कागज़ लिए। उसकी आँखों में आँसू आ गए।
उसने सोचा, 'यही तो मेरी बेगुनाही साबित कर सकता है।' नौकर ने यह देखा तो उसने कहा, 'माँ, तुमने यह मुझे क्यों नहीं बताया?' माँ ने कहा, 'मुझे डर था कि सुधा हमें और नुकसान पहुँचाएगी।' आर्या ने माँ को गले लगाया, 'धन्यवाद। आपने मेरी बहुत मदद की।' माँ ने आर्या से कहा, 'बेटी, सुधा ने तेरे पिता की ज़मीन के कागज़ों में हेराफेरी की थी, यह बात किसी को मत बताना।' आर्या ने कागज़ों को अपनी साड़ी में छिपाया और नौकर की माँ को धन्यवाद देकर वहाँ से निकल गई। उसके मन में अब एक नई उम्मीद जगी थी, लेकिन साथ ही डर भी था कि सुधा को इसका पता चल गया तो वह क्या करेगी। नौकर की माँ ने आर्या से कहा, 'बेटी, सुधा ने तेरे पिता की जमीन के कागजों में हेराफेरी की थी, यह बात किसी को मत बताना।'






💬 Reader Comments
Comments are coming soon. Join the discussion about दिल का दरिया!