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📖 दिल का दरिया

आर्या की चुप्पी

693 words

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आदित्य की धमकी के बाद आर्या रात भर रोती रही। उसके आँसू तकिये को भिगो रहे थे, लेकिन उसने आवाज़ नहीं निकाली। उसे डर था कि कहीं सुधा उसकी कमज़ोरी न देख ले। सुबह होते ही उसने फैसला किया कि वह चुप रहेगी। चुप्पी उसकी ढाल बनेगी। वह जानती थी कि अगर वह बोलेगी, तो सुधा उसे और फँसाएगी। इसलिए उसने तय किया कि वह अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए सबूत जुटाएगी। वह उठी, अपना चेहरा धोया, और रसोई में चली गई। सुधा पहले से ही वहाँ थी। उसने आर्या को देखकर ताना मारा, 'आज फिर से चोरी करने का मन है?' आर्या ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने चुपचाप काम करना शुरू कर दिया। उसकी चुप्पी देखकर सुधा और भड़क गई, लेकिन आर्या ने उसे अनदेखा किया। वह जानती थी कि आज उसे कुछ करना है। पूरे दिन आर्या ने बिना किसी शिकायत के सुधा के हर काम को किया। उसने फर्श पोंछा, बर्तन धोए, कपड़े धोए, और खाना बनाया। सुधा उसे हर काम में टोकती रही, 'इतनी धीमी क्यों हो? जल्दी करो!' आर्या ने अपना गुस्सा पी लिया। वह जानती थी कि उसे सुधा के खिलाफ सबूत चाहिए। दोपहर में जब सुधा आराम करने गई, आर्या ने नौकरों से बातचीत शुरू की। उसने पूछा, 'भैया, आप इस घर में कितने साल से काम कर रहे हैं?' नौकर ने कहा, 'बहू जी, मैं तो बचपन से यहाँ हूँ।' आर्या ने पूछा, 'क्या आपको सुधा जी के बारे में कुछ पता है? क्या उन्होंने कभी किसी के साथ गलत किया है?' नौकर झिझका, लेकिन आर्या के पूछने पर बोला, 'बहू जी, मैं क्या बताऊँ, लेकिन एक बात सुन लीजिए। सुधा जी ने अपने पति की ज़मीन हड़पने में मदद की थी। उन्होंने अपने पति के भाई को बर्बाद कर दिया था।' आर्या हैरान रह गई। उसने पूछा, 'क्या मतलब?' नौकर ने कहा, 'जी, सुधा जी ने अपने पति के भाई को फँसाया था, और उनकी ज़मीन अपने नाम कर ली थी।' आर्या को यह सुनकर झटका लगा। उसने सोचा, 'तो यह महिला कितनी क्रूर है।' उसी समय सुधा की आवाज़ आई, 'आर्या, कहाँ हो? मुझे चाय चाहिए।' आर्या ने जल्दी से नौकर से कहा, 'भैया, यह बात किसी को मत बताना।' और वह चाय बनाने चली गई। सुधा ने चाय पीते हुए आर्या को और अपमानित किया, 'तुम्हारी वजह से मेरा दिन खराब हो गया। पता नहीं मेरा बेटा तुम जैसी लड़की को क्यों लाया।' आर्या ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसके मन में सुधा के खिलाफ सबूत जुटाने का संकल्प और मजबूत हो गया। शाम को जब आदित्य ऑफिस से लौटा, तो आर्या ने उससे बात करने की कोशिश नहीं की। वह जानती थी कि अगर वह बोलेगी, तो सुधा उसे और बदनाम करेगी। आदित्य ने भी उसे अनदेखा किया। उसके चेहरे पर गुस्सा साफ़ दिख रहा था। आर्या ने सोचा, 'अगर मैं चुप रहूँगी, तो शायद वह मुझ पर विश्वास करेगा।' लेकिन उसकी चुप्पी ने आदित्य को और दूर कर दिया। उसने सोचा, 'यह औरत चोर है, और अब चुप रहकर अपना अपराध छिपा रही है।' रात के खाने के बाद आर्या अपने कमरे में चली गई। उसने दरवाज़ा बंद कर लिया। वह सोचने लगी, 'मुझे सुधा की असलियत सबके सामने लानी होगी।' उसने नौकर से मिली जानकारी को याद किया। उसने सोचा, 'अगर मैं इस बात का सबूत जुटा लूँ, तो शायद आदित्य मुझ पर विश्वास करे।' लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि सबूत कैसे जुटाए। वह जानती थी कि सुधा बहुत चालाक है। उसने फैसला किया कि वह आदित्य से दूर रहेगी, ताकि सुधा को और मौका न मिले। उसने सोचा, 'अगर मैं उससे बात नहीं करूँगी, तो शायद वह मेरी बात सुनेगा।' लेकिन उसकी यह चुप्पी उनके रिश्ते में दरार डाल रही थी। आर्या को यह अहसास हुआ कि उसकी चुप्पी उसके लिए और मुश्किलें खड़ी कर रही है। रात को जब सब सो गए, आर्या ने नौकर से मिली जानकारी के बारे में सोचा। उसे यकीन हो गया कि सुधा ने उसके पिता को बर्बाद किया था। उसने मन बना लिया कि वह सुधा के खिलाफ सबूत जुटाएगी। नौकर ने आर्या को बताया कि सुधा ने उसके पिता को बर्बाद किया था, और आर्या ने सुधा के खिलाफ सबूत जुटाने का मन बना लिया।
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