📖 दिल का दरिया
सास की साज़िश
अगली सुबह आर्या की आँखें खुलीं तो उसके मन में अभी भी कल रात की बातें घूम रही थीं। आदित्य की डायरी के पन्नों में लिखा दर्द उसे बार-बार याद आ रहा था। उसने सोचा, 'अगर मैं उसका दर्द समझ सकती हूँ, तो शायद वह भी मुझे समझ पाए।' वह उठी और कमरे की सफाई करने लगी। तभी सुधा ने आवाज़ दी, 'आर्या, सुनती हो?' आर्या तुरंत उनके पास पहुँची।
सुधा ने उसे बाज़ार से कुछ सामान लाने को कहा और एक छोटी सी रकम थमाते हुए बोली, 'ये लो, इसी में सब कुछ ले आना।' आर्या ने पैसे गिने तो उसे अंदाज़ा हो गया कि यह रकम काफी नहीं है। लेकिन उसने कुछ नहीं कहा, बस सिर हिलाया और बाहर निकल गई। बाज़ार में आर्या ने सारी चीज़ें खरीदीं, लेकिन पैसे कम पड़ गए। उसने अपने पास से पैसे लगाकर सामान पूरा किया।
घर लौटकर उसने सुधा को सामान और हिसाब दिया। सुधा ने बिल देखा और भौंहें चढ़ाते हुए कहा, 'इतने पैसे में इतना सामान? तुमने कुछ छुपाया तो नहीं?' आर्या ने विनम्रता से जवाब दिया, 'माँ जी, मैंने अपने पैसे भी लगाए हैं, सब बिल यहाँ है।' सुधा ने बिल को फाड़कर फेंक दिया और चिल्लाई, 'तुम चोर हो! तुमने मेरे पैसे चुराए हैं!' आर्या के होश उड़ गए।
उसने समझाने की कोशिश की, 'नहीं माँ जी, मैंने ऐसा कुछ नहीं किया।' लेकिन सुधा ने उसे बोलने नहीं दिया। वह ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी, 'मैं आदित्य को बताऊँगी कि तुम कैसी हो! वह तुम्हें घर से निकाल देगा!' आर्या की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। वह बोली, 'माँ जी, मैंने कोई चोरी नहीं की।
आप चाहें तो दुकानदार से पूछ सकती हैं।' सुधा ने तिरस्कार से देखा, 'मुझे तुम्हारी बातों पर भरोसा नहीं। तुम सब झूठ बोलती हो।' आर्या ने सोचा, 'यह मेरी परीक्षा है, मुझे शांत रहना होगा।' वह चुपचाप वहीं खड़ी रही, जबकि सुधा उसे अपशब्द कहती रही। शाम को जब आदित्य ऑफिस से लौटा, तो सुधा ने उसे अपने कमरे में बुलाया और आर्या के खिलाफ भड़काने लगी। 'देखा तुमने, जिस लड़की को तुम लाए हो, वह चोर है।
आज उसने मेरे पैसे चुरा लिए।' आदित्य ने हैरानी से पूछा, 'क्या?' सुधा ने आगे कहा, 'हाँ, मैंने उसे बाज़ार भेजा था, और उसने सामान के नाम पर कम पैसे दिखाए। बाकी पैसे उसने रख लिए।' आदित्य का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। वह सीधे आर्या के पास गया और डांटते हुए बोला, 'तुमने यह क्या किया? मुझे उम्मीद नहीं थी कि तुम ऐसी हो।' आर्या ने आँसुओं के साथ कहा, 'मैंने कुछ नहीं किया, आदित्य।
मैंने अपने पैसे लगाए थे।' लेकिन आदित्य ने उसकी एक न सुनी। वह बोला, 'तुम्हारी बातों का कोई भरोसा नहीं। मेरी माँ झूठ नहीं बोल सकतीं।' आर्या ने उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की, लेकिन उसने झटक दिया। आर्या को लगा जैसे उसकी दुनिया टूट गई।
उसने सोचा, 'मैंने इतनी मेहनत की, फिर भी वह मुझ पर विश्वास नहीं करता।' आदित्य ने गुस्से में कहा, 'अगर तुमने दोबारा ऐसा किया, तो मैं तुम्हें घर से निकाल दूँगा।' आर्या की आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। वह जानती थी कि यह सब सुधा की साज़िश है, लेकिन उसके पास कोई सबूत नहीं था। आदित्य ने आर्या से कहा कि अगर उसने दोबारा ऐसी हरकत की तो वह उसे घर से निकाल देगा, जिससे आर्या टूट गई।






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