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📖 दिल का दरिया

आदित्य की नज़र

510 words

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आदित्य के चुपचाप कमरे से बाहर जाने के बाद आर्या की आँखें भर आईं। उसने सोचा, 'क्या मैं सच में इतनी बेकार हूँ?' लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने रात भर सोचा कि कैसे वह आदित्य का ध्यान अपनी ओर खींचे। उसे यकीन था कि अगर वह उसे अपनी भावनाओं से अवगत करा दे, तो शायद वह उसे समझ पाए। अगली सुबह, जब घर में हलचल शुरू हुई, आर्या ने तय किया कि वह आज कुछ अलग करेगी। वह रसोई में गई और आदित्य के लिए टिफिन तैयार करने लगी। उसके हाथ काँप रहे थे, लेकिन उसने हार नहीं मानी। आर्या ने ध्यान से टिफिन तैयार किया। उसमें रोटी, सब्ज़ी और एक छोटा सा नोट रखा। नोट पर उसने लिखा, 'आदित्य जी, मैं आपका दर्द समझती हूँ। आप अकेले नहीं हैं। मैं आपकी परवाह करती हूँ।' फिर उसने टिफिन को ढककर आदित्य के कमरे में रख दिया। वह सोच रही थी कि शायद वह इसे पढ़े और उसकी बात समझे। तभी सुधा वहाँ आ गई। उसने आर्या को टिफिन रखते देख लिया। उसकी आँखों में गुस्सा था। वह चिल्लाई, 'अरे! तुम यहाँ क्या कर रही हो? मेरे बेटे के कमरे में क्या रख रही हो?' आर्या घबरा गई, लेकिन उसने शांति से जवाब दिया, 'माँ जी, मैंने आदित्य जी के लिए टिफिन तैयार किया है।' सुधा ने तुरंत टिफिन उठाया और बोली, 'इसमें क्या रखा है? कहीं ज़हर तो नहीं?' आर्या ने हैरान होकर कहा, 'नहीं, माँ जी, मैंने तो बस खाना बनाया है।' सुधा ने उसे धक्का देते हुए कहा, 'मुझे पता है तुम क्या करना चाहती हो। तुम मेरे बेटे को बरबाद करना चाहती हो।' इतने में आदित्य वहाँ आ गया। उसने पूछा, 'क्या हुआ?' सुधा ने टिफिन दिखाते हुए कहा, 'देखो, तुम्हारी पत्नी तुम्हें ज़हर देने की कोशिश कर रही है।' आदित्य ने हैरानी से आर्या की ओर देखा। उसकी आँखों में शक था। उसने टिफिन लिया और खोलने से पहले झिझक महसूस की। आदित्य ने धीरे से टिफिन खोला। अंदर खाना था और एक छोटा सा नोट। उसने नोट पढ़ा। उसके चेहरे का भाव बदल गया। उसने सोचा, 'यह लड़की मेरे दर्द के बारे में कैसे जानती है?' उसने खाना खाया। सुधा हैरान रह गई। वह चिल्लाई, 'बेटा, तुम पागल हो गए हो? उसका खाना खा रहे हो?' आदित्य ने शांति से कहा, 'माँ, यह खाना बिल्कुल ठीक है।' सुधा गुस्से में वहाँ से चली गई। आदित्य ने आर्या की ओर देखा। उसकी नज़र में नरमी थी। उसने पूछा, 'तुम्हें मेरे दर्द के बारे में कैसे पता चला?' आर्या घबरा गई। उसने सोचा, 'अगर मैंने डायरी पढ़ने की बात बताई, तो वह नाराज़ हो जाएगा।' उसने झट से जवाब दिया, 'मैंने नौकरों से सुना था।' आदित्य ने उसकी ओर देखा, लेकिन उसे उसकी बात पर पूरा यकीन नहीं हुआ। शाम को, जब घर में सन्नाटा छा गया, आदित्य आर्या के पास आया। उसकी आँखों में सवाल था। उसने पूछा, 'तुमने झूठ बोला है, है ना?' आर्या का दिल धड़कने लगा। आदित्य के सवाल से बचने के लिए आर्या ने कहा कि उसने नौकरों से सुना था, लेकिन आदित्य को उसकी बात पर पूरा यकीन नहीं हुआ।
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