📖 दिल का दरिया
पहला अपमान
सुधा के जाते ही आर्या के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उसकी आँखों के सामने अंधेरा छा गया। उसने सोचा, 'क्या यही मेरी ज़िंदगी है? हर दिन एक नई धमकी, एक नया अपमान?' लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी।
उसने मन ही मन कहा, 'मुझे अपनी मेहनत से सबको दिखाना है।' वह रसोई में गई और कल के नाश्ते की तैयारी में जुट गई। उसने आटा गूंथा, सब्ज़ी काटी, और मन ही मन सोचती रही कि सुधा उसे किसी भी बहाने से नीचा दिखा सकती है। उसने तय किया कि वह कोई गलती नहीं होने देगी। वह हर काम को ध्यान से करेगी, ताकि सुधा को कोई शिकायत न मिले।
दोपहर बाद, सुधा ने आर्या को लिविंग रूम में बुलाया। आर्या ने जाते ही देखा कि फर्श पर पानी गिरा हुआ है। सुधा ने तुरंत चिल्लाना शुरू कर दिया, "यह क्या है? तुम्हें देखकर नहीं लगता कि फर्श पर पानी गिरा है?
क्या तुम्हें इतनी भी अक्ल नहीं है कि उसे साफ कर दो? या तुम्हें लगता है कि तुम नौकरानी हो, जो मेरे कहने पर ही काम करेगी?" आर्या ने चुपचाप कपड़ा उठाया और फर्श साफ करने लगी। उसकी आँखों में आँसू आ गए, लेकिन उसने खुद को रोके रखा। सुधा ने उसे और नीचा दिखाते हुए कहा, "तुम्हारे जैसी लड़कियों को सिर्फ काम करना आता है, कुछ और नहीं।
मेरा बेटा तुम्हारे लायक नहीं था, लेकिन मैंने उसकी ज़िद के आगे हार मान ली। अब तुम्हें यहाँ रहना है तो मेरी हर बात माननी होगी।" आर्या ने फर्श साफ करने के बाद सीधा होकर सुधा की तरफ देखा। उसकी आँखों में दर्द था, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। सुधा ने धमकी दी, "अगर तुमने आदित्य से मेरी कोई शिकायत की, तो मैं तुम्हें घर से निकाल दूँगी।
और याद रखना, मेरे पास तुम्हें बदनाम करने के तरीके हैं।" आर्या ने सिर झुका लिया और कहा, "मैं कोई शिकायत नहीं करूँगी।" सुधा ने तिरस्कार से देखा और कहा, "बेहतर है। अब जाकर कल के मेहमानों के लिए सब कुछ तैयार करो। अगर कोई कमी रही, तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना।" आर्या रसोई में लौट आई। उसके हाथ काँप रहे थे, लेकिन उसने खुद को संभाला।
उसने सोचा, 'मुझे अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी। कोई मेरी मदद नहीं करेगा।' उसने नाश्ते के लिए पूड़ी और सब्ज़ी बनाने का फैसला किया। वह जानती थी कि सुधा उसे किसी भी बात पर फटकार सकती है, लेकिन उसने ठान लिया था कि वह हार नहीं मानेगी। शाम को आदित्य ऑफिस से लौटा।
उसने लिविंग रूम में आर्या को उदास बैठे देखा। उसकी आँखें लाल थीं, जैसे वह रोई हो। आदित्य ने कुछ नहीं पूछा। वह चुपचाप अपने कमरे में चला गया।
आर्या ने उसे देखा, लेकिन उसने भी कुछ नहीं कहा। उसे एहसास हुआ कि आदित्य उसकी परवाह नहीं करता। वह उसके लिए एक अजनबी था। आर्या ने मन ही मन कहा, 'मुझे अपनी इज्जत खुद बनानी होगी।' उसने आँसू पोंछे और खुद से वादा किया कि वह कभी हार नहीं मानेगी।
वह उठकर रसोई में गई और कल के खाने की तैयारी में जुट गई। उसने सोचा, 'मैं अपनी मेहनत से सबको दिखा दूँगी कि मैं किसी से कम नहीं हूँ।' उसने तय किया कि वह सुधा की हर बात मानेगी, लेकिन अपने आत्मसम्मान को नहीं खोएगी। वह जानती थी कि यह आसान नहीं होगा, लेकिन वह कोशिश करती रहेगी। रात को आर्या अपने कमरे में अकेली बैठी थी।
उसने सोचा कि आदित्य ने उसे उदास देखा, लेकिन उसने कोई सवाल नहीं किया। उसे लगा कि शायद वह उसकी परवाह नहीं करता। शाम को आदित्य ने आर्या को उदास देखा, लेकिन उसने कोई सवाल नहीं किया, जिससे आर्या को एहसास हुआ कि उसे अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी।






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