📖 दिल का दरिया
आदित्य का रुख
आदित्य ने आर्या की तरफ देखा, फिर बिना कुछ कहे अपने कमरे में चला गया। अगली सुबह आर्या ने आदित्य के लिए खास नाश्ता बनाया, लेकिन आदित्य ने उसे अनदेखा कर दिया और सुधा के कहने पर बाहर से खाना मंगवा लिया। आर्या ने जब यह देखा तो उसका दिल टूट गया, लेकिन उसने अपनी भावनाओं को छिपाया। वह जानती थी कि सुधा उसे नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ेगी।
उसने सोचा, 'मुझे अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी।' वह रसोई में लौट आई और बचे हुए नाश्ते को खुद खा लिया। उसने मन ही मन तय किया कि वह आदित्य का ध्यान अपनी मेहनत से खींचेगी, न कि शिकायतों से। उसने सोचा कि शायद आदित्य को उसकी परवाह नहीं है, लेकिन वह हार नहीं मानेगी। सुबह के नाश्ते के बाद सुधा ने आदित्य से कहा, 'बेटा, ये लड़की घर के काम में बिल्कुल ध्यान नहीं देती।
कल मेहमानों के लिए खाना बनाते समय उसने नमक कम डाल दिया था। ऐसी बहू से घर की इज़्ज़त नहीं रहेगी।' आदित्य ने बिना सोचे-समझे आर्या को डांट दिया, 'तुम्हें घर के काम करना नहीं आता? माँ की बातों का ध्यान रखो।' आर्या ने पलटकर कहा, 'मैंने नमक कम नहीं डाला था, मैंने सब कुछ ठीक किया था।' लेकिन आदित्य ने उसकी एक न सुनी और कहा, 'बहाने मत बनाओ। काम पर ध्यान दो।' आर्या की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन उसने खुद को रोका।
वह जानती थी कि सुधा उसे फँसाने की कोशिश कर रही है। आदित्य के ऑफिस जाने के बाद आर्या ने उसके कमरे की सफाई करने का फैसला किया। वह चुपचाप कमरे में गई और सामान सही करने लगी। तभी उसे बिस्तर के नीचे एक डायरी मिली।
वह उसे उठाकर पढ़ने लगी। डायरी में आदित्य ने अपनी पूर्व प्रेमिका के धोखे के बारे में लिखा था। आर्या को पढ़कर हैरानी हुई, लेकिन साथ ही उसे आदित्य के प्रति सहानुभूति भी हुई। उसने सोचा, 'तो यही वजह है कि वह इतना दूर रहता है।' उसने डायरी को वापस रख दिया, लेकिन उसकी बातें उसके दिमाग में घूमती रहीं।
डायरी पढ़ने के बाद आर्या को आदित्य के दर्द का अंदाजा हुआ। उसने सोचा कि शायद इसीलिए वह किसी पर भरोसा नहीं करता। उसके मन में आदित्य के प्रति सहानुभूति पैदा हुई, और उसने तय किया कि वह उसका दर्द कम करने की कोशिश करेगी। वह चाहती थी कि आदित्य उस पर भरोसा करे, लेकिन वह जानती थी कि यह आसान नहीं होगा।
उसने डायरी को छिपाकर रख लिया, ताकि सुधा को पता न चले। वह सोचने लगी कि आदित्य के दिल तक कैसे पहुँचा जाए। उसने फैसला किया कि वह अपने काम और व्यवहार से उसे प्रभावित करेगी। शाम को जब आदित्य ऑफिस से लौटा, तो आर्या ने उसे चाय पिलाई और मुस्कुराकर पूछा, 'चाय कैसी लगी?' आदित्य ने उसे देखा, लेकिन कुछ नहीं बोला।
आर्या ने हिम्मत नहीं हारी। उसने सोचा, 'मैं उसे समझाऊँगी कि मैं उसकी परवाह करती हूँ।' वह जानती थी कि यह लंबा सफर होगा, लेकिन वह कोशिश करती रहेगी। रात को आर्या ने डायरी को फिर से पढ़ा। उसमें आदित्य ने लिखा था कि कैसे उसकी पूर्व प्रेमिका ने उसे धोखा दिया और उसका दिल तोड़ दिया।
आर्या को समझ आया कि आदित्य अब भी उस दर्द से उबर नहीं पाया है। उसने सोचा कि शायद वह उसे इस दर्द से निकाल सकती है। डायरी में आदित्य ने अपनी पूर्व प्रेमिका के धोखे का जिक्र किया था, जिसे पढ़कर आर्या को आदित्य के दर्द का अंदाजा हुआ।






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