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📖 दिल का दरिया

झूठा आरोप

836 words

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अगली सुबह, सुधा ने अपनी योजना को अंजाम दिया। उसने पुलिस को फोन करके आर्या पर घर के गहने चुराने का झूठा आरोप लगा दिया। कुछ ही देर में दो पुलिसकर्मी घर आ गए। पूरे परिवार में हड़कंप मच गया। आर्या अपने कमरे में थी, तभी नौकरानी ने आकर बताया, "बहू जी, पुलिस आई है, आपको बुला रही है।" आर्या का दिल धड़क गया। वह समझ गई कि सुधा ने कुछ कर दिया है। वह सीधे लिविंग रूम में गई, जहाँ सुधा, आदित्य और पुलिसकर्मी मौजूद थे। सुधा ने आर्या को देखते ही चिल्लाकर कहा, "यही है वह चोर! इसने मेरे गहने चुराए हैं।" आर्या ने हैरानी से कहा, "माँ जी, मैंने ऐसा कुछ नहीं किया।" पुलिसकर्मी ने सख्ती से पूछा, "क्या आपके पास कोई सबूत है?" सुधा ने तुरंत नौकर को आगे किया, जो डरा हुआ था। नौकर ने काँपती आवाज़ में कहा, "मैंने... मैंने बहू जी को गहने ले जाते देखा था।" आर्या की आँखें फटी रह गईं। वह समझ गई कि सुधा ने नौकर को धमकाया है। उसने दृढ़ता से कहा, "यह झूठ है। मैंने कभी चोरी नहीं की।" पुलिसकर्मी ने आर्या से पूछताछ शुरू की। "आप कब से इस घर में हैं?" आर्या ने शांति से जवाब दिया, "मैं यहाँ बहू बनकर आई हूँ, और मैंने हमेशा ईमानदारी से काम किया है।" सुधा ने बीच में कहा, "यह बहाने बनाती है। इसने मेरे कमरे से गहने निकाले और अपने बिस्तर के नीचे छिपा दिए।" पुलिसकर्मी ने आर्या से पूछा, "क्या आपके पास इसका कोई जवाब है?" आर्या ने कहा, "मैंने वे गहने नहीं छुए। माँ जी ने खुद उन्हें मेरे कमरे में रखवाए होंगे।" सुधा ने गुस्से में कहा, "तुम मुझ पर आरोप लगा रही हो?" पुलिसकर्मी ने नौकर से पूछा, "तुमने कब देखा?" नौकर ने नीचे देखते हुए कहा, "कल रात, जब सब सो रहे थे।" आर्या ने नौकर की ओर देखा, "तुम झूठ बोल रहे हो। मैंने कभी ऐसा नहीं किया।" पुलिसकर्मी ने सख्ती से कहा, "हमें आपके कमरे की तलाशी लेनी होगी।" आर्या ने सिर हिलाया, "जरूर, मेरे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।" पुलिसकर्मी आर्या के कमरे में गए, लेकिन वहाँ से कुछ नहीं मिला। सुधा ने कहा, "शायद उसने कहीं और छिपा दिया।" पुलिसकर्मी ने पूछा, "और कहाँ देखा जाए?" सुधा ने कहा, "उसकी साड़ी की तह में।" आर्या ने कहा, "मैंने कोई साड़ी नहीं छिपाई।" पुलिसकर्मी ने आर्या से कहा, "हमें आपको थाने चलना होगा।" आर्या घबरा गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने कहा, "मैं चलूँगी, लेकिन मैं बेगुनाह हूँ।" तभी आदित्य आगे आया। उसने पुलिसकर्मी से कहा, "रुकिए। यह पारिवारिक मामला है। मैं इसकी ज़मानत लेता हूँ।" पुलिसकर्मी ने पूछा, "आप कौन हैं?" आदित्य ने कहा, "मैं इस घर का बेटा हूँ, और मुझे पूरा भरोसा है कि आर्या ने ऐसा नहीं किया।" सुधा ने गुस्से में कहा, "आदित्य, तुम इसके पक्ष में क्यों खड़े हो?" आदित्य ने दृढ़ता से कहा, "क्योंकि मैं सच जानता हूँ।" पुलिसकर्मी ने आदित्य की बात मान ली और कहा, "ठीक है, लेकिन जाँच जारी रहेगी। हमें जल्द ही सबूत चाहिए।" पुलिस के जाने के बाद, आदित्य आर्या के पास आया। उसने धीरे से कहा, "तुम ठीक तो हो?" आर्या ने आँसू रोकते हुए कहा, "हाँ, बस डर गई थी।" आदित्य ने उसका हाथ पकड़ा और कहा, "मुझे पता है तुमने ऐसा नहीं किया। मैं तुम्हारे साथ हूँ।" आर्या ने उसकी आँखों में देखा, "धन्यवाद, आदित्य। तुमने मेरी मदद की।" आदित्य ने कहा, "यह मेरा फर्ज़ था। तुम इस घर की बहू हो, और मैं तुम्हें किसी भी हाल में अकेला नहीं छोड़ूँगा।" सुधा ने यह देखा और उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया। वह चिल्लाई, "आदित्य, तुम इस लड़की के पक्ष में हो?" आदित्य ने शांति से कहा, "माँ, मैं सच के पक्ष में हूँ।" सुधा ने आर्या को जलती नज़रों से देखा और कहा, "तुमने मेरे बेटे को अपने जाल में फँसा लिया है।" आर्या ने विनम्रता से कहा, "माँ जी, मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। मैं सिर्फ अपनी बेगुनाही साबित करना चाहती हूँ।" आदित्य ने आर्या को सहारा देते हुए कहा, "तुम चिंता मत करो। मैं सच का पता लगाऊँगा।" आर्या ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुम्हारा भरोसा ही मेरी ताकत है।" उस दिन के बाद, आर्या को लगा कि आदित्य उसके साथ है, और उसकी हिम्मत बढ़ गई। उसने सोचा, 'मुझे सुधा के खिलाफ सबूत जुटाने होंगे, ताकि वह दोबारा ऐसा न कर सके।' शाम को, जब सब अपने कमरों में चले गए, सुधा ने आदित्य को अपने कमरे में बुलाया। उसकी आँखों में गुस्सा था। उसने कहा, "आदित्य, मैंने तुम्हें बड़ा किया है, और तुम मेरे खिलाफ जा रहे हो?" आदित्य ने कहा, "माँ, मैं आपके खिलाफ नहीं हूँ, लेकिन आर्या निर्दोष है।" सुधा ने गुस्से में कहा, "तुम्हें चुनना होगा - या तो मैं, या वह लड़की।" आदित्य ने कहा, "माँ, यह कोई चुनाव नहीं है।" सुधा ने आँखें सिकोड़ते हुए कहा, "अगर तूने इस लड़की का साथ दिया, तो मैं तुझे इस घर और कारोबार से बाहर कर दूँगी।" सुधा ने आदित्य से कहा, 'अगर तूने इस लड़की का साथ दिया तो मैं तुझे इस घर और कारोबार से बाहर कर दूंगी।'
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