📖 दिल का दरिया
सामना
आदित्य के कहने पर वे वकील के ऑफिस पहुँचे। शाम का समय था, लखनऊ की सड़कों पर रोशनी जलने लगी थी। वकील साहब का ऑफिस एक पुरानी इमारत में था, जिसकी दीवारें समय के साथ पीली पड़ चुकी थीं। अंदर जाते ही आर्या ने महसूस किया कि यहाँ का माहौल भारी है।
वकील साहब, जिनका नाम शर्मा जी था, अपनी कुर्सी पर बैठे थे। उन्होंने आदित्य को देखते ही पहचान लिया, लेकिन उनके चेहरे पर खुशी नहीं थी। आदित्य ने आर्या को बैठने का इशारा किया और फिर शर्मा जी से बोला, 'शर्मा जी, हम आपसे कुछ ज़रूरी बात करने आए हैं।' शर्मा जी ने चश्मा उतारकर मेज पर रखा और गहरी साँस ली। 'मुझे पता है, आदित्य।
तुम्हारी माँ ने मुझे फोन किया था।' आर्या ने हैरानी से आदित्य की तरफ देखा। आदित्य ने पूछा, 'माँ ने? उन्होंने क्या कहा?' शर्मा जी ने झिझकते हुए कहा, 'उन्होंने कहा कि तुम लोग कुछ गलत सबूत इकट्ठा कर रहे हो। मैं नहीं चाहता कि मेरा नाम इस झंझट में पड़े।' आदित्य ने दृढ़ता से कहा, 'शर्मा जी, हम सच्चाई जानना चाहते हैं।
आप मेरे पिता के वकील रहे हैं। क्या आपको ज़मीन के कागजातों के बारे में कुछ पता है?' शर्मा जी ने आर्या की तरफ देखा, फिर आदित्य की तरफ। 'मैं कुछ नहीं जानता, आदित्य। तुम्हारी माँ ने सब कुछ संभाला हुआ है।' आर्या ने हिम्मत करके कहा, 'शर्मा जी, हमें पता है कि सुधा जी ने ज़मीन के कागजातों में हेराफेरी की है।
हमें सिर्फ सबूत चाहिए।' शर्मा जी ने बेचैनी से इधर-उधर देखा। 'तुम क्या कह रही हो? यह गंभीर आरोप है।' आदित्य ने आगे बढ़कर कहा, 'शर्मा जी, मैंने खुद कुछ दस्तावेज देखे हैं। माँ ने मुझे धोखा दिया है।
हमें आपकी मदद चाहिए।' शर्मा जी ने सिर हिलाया, 'मैं मदद नहीं कर सकता। तुम्हारी माँ बहुत ताकतवर है। अगर उसे पता चला कि मैंने तुम्हें कुछ बताया, तो मेरी नौकरी चली जाएगी।' आर्या ने उनसे विनती की, 'शर्मा जी, आप एक वकील हैं। आपका फर्ज़ है सच्चाई के साथ खड़ा होना।' शर्मा जी ने गुस्से में कहा, 'तुम्हें क्या पता फर्ज़ के बारे में?
मैंने अपनी ज़िंदगी में बहुत कुछ देखा है। यहाँ सच्चाई की कोई कीमत नहीं है।' आदित्य ने मेज पर हाथ मारा, 'लेकिन हम हार नहीं मानेंगे।' शर्मा जी ने आह भरी, 'तुम मुझे मुश्किल में डाल रहे हो।' उसी समय, शर्मा जी के फोन की घंटी बजी। उन्होंने फोन उठाया और बात करने लगे। उनका चेहरा पीला पड़ गया।
फोन रखने के बाद वे काँपते हुए बोले, 'यह तुम्हारी माँ थी। उसने मुझे धमकी दी है। अगर मैंने तुम्हारी मदद की, तो वह मुझे बदनाम कर देगी।' आर्या ने कहा, 'शर्मा जी, हम आपकी रक्षा करेंगे।' शर्मा जी ने सिर हिलाया, 'नहीं, मैं जोखिम नहीं ले सकता। तुम लोग चले जाओ।' आदित्य ने निराश होकर कहा, 'शर्मा जी, हमें कुछ तो बताइए।' शर्मा जी ने कुछ सोचा, फिर धीरे से बोले, 'मैं कुछ नहीं जानता।
लेकिन एक बात है...' उन्होंने रुककर आर्या की तरफ देखा, 'तुम्हारे गाँव में एक आदमी रहता है, रामू काका। वह पहले सुधा के यहाँ काम करता था। उसके पास कुछ पुराने कागजात हो सकते हैं।' आर्या और आदित्य ने एक-दूसरे की तरफ देखा। उनकी आँखों में उम्मीद की किरण थी।
आदित्य ने शर्मा जी से पूछा, 'रामू काका? वह कौन है?' शर्मा जी ने जवाब दिया, 'वह सुधा के पुराने नौकर थे। उन्होंने कई सालों तक उसके यहाँ काम किया। शायद उन्हें ज़मीन के बारे में कुछ पता हो।' आर्या ने कहा, 'हमें उनसे मिलना होगा।' आदित्य ने उसका हाथ पकड़ा, 'हाँ, लेकिन पहले हमें पता करना होगा कि वह कहाँ रहते हैं।' शर्मा जी ने कहा, 'वह तुम्हारे गाँव में ही रहता है।
मुझे लगता है कि वह अब भी वहीं है।' आर्या के मन में सवाल उठा, 'लेकिन वह हमारी मदद क्यों करेगा?' आदित्य ने कहा, 'हमें कोशिश करनी होगी। शायद उसे भी सुधा से शिकायत हो।' शर्मा जी ने चेतावनी दी, 'लेकिन सावधान रहना। सुधा को अगर पता चला कि तुम लोग रामू से मिले हो, तो वह उसे भी धमकी दे सकती है।' आर्या ने दृढ़ता से कहा, 'हमें कोई और रास्ता नहीं है। हमें यह जोखिम उठाना होगा।' आदित्य ने उसकी तरफ देखा, 'तुम्हारी हिम्मत देखकर मुझे ताकत मिलती है।
हम साथ मिलकर सच्चाई सामने लाएँगे।' आर्या ने मुस्कुराते हुए कहा, 'धन्यवाद, आदित्य। तुम्हारे साथ होने से मुझे भरोसा है।' दोनों ने शर्मा जी को धन्यवाद दिया और ऑफिस से बाहर निकलने लगे। शर्मा जी ने उन्हें आवाज़ दी, 'एक मिनट।' दोनों रुक गए। शर्मा जी ने धीरे से कहा, 'रामू काका से मिलो, शायद उनके पास कुछ हो।' शर्मा जी का चेहरा गंभीर था।
उन्होंने आदित्य और आर्या की तरफ देखा, फिर धीरे से बोले, 'रामू काका से मिलो, शायद उनके पास कुछ हो।' वकील धीरे से कहता है, 'गाँव में रहने वाले रामू काका से मिलो, शायद उनके पास कुछ हो।'






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